गरियाबंद के लिए गौरव का पल: लक्ष्मीकांत सिन्हा बने डॉक्टर, मच्छर जनित रोगों पर शोध से जिले को मिलेगी नई दिशा

गरियाबंद के लिए गौरव का पल: लक्ष्मीकांत सिन्हा बने डॉक्टर, मच्छर जनित रोगों पर शोध से जिले को मिलेगी नई दिशा

परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद /छुरा-गरियाबंद जिले के लिए गर्व और सम्मान का क्षण उस समय सामने आया, जब जिले के युवा शोधार्थी लक्ष्मीकांत सिन्हा ने प्राणीशास्त्र विषय में पीएच.डी. की उपाधि सफलतापूर्वक प्राप्त कर जिले और क्षेत्र का नाम रोशन किया। आई.एस.बी.एम. विश्वविद्यालय, छुरा, गरियाबंद के विज्ञान संकाय अंतर्गत उन्होंने “गरियाबंद जिला, छत्तीसगढ़ में मच्छर जनित रोगों का सर्वेक्षण एवं उनके नियंत्रण की रणनीतियाँ” विषय पर अपना शोध कार्य पूर्ण किया।

 सिन्हा ने अपनी अंतिम मौखिक परीक्षा सफलता पूर्वक उत्तीर्ण कर डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की। उनका यह शोध कार्य आई.एस.बी.एम. विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक एवं मार्गदर्शक प्रोफेसर डॉ. पी. विश्वनाथन के निर्देशन में संपन्न हुआ।

यह शोध गरियाबंद जिले की स्थानीय स्वास्थ्य समस्याओं को केंद्र में रखकर किया गया है, जिसमें विशेष रूप से मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया सहित विभिन्न मच्छर जनित रोगों की स्थिति, उनके फैलाव के कारण, ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जन-जागरूकता की स्थिति तथा रोग नियंत्रण के प्रभावी उपायों का विस्तृत अध्ययन किया गया है। शोध में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नियंत्रण रणनीतियों और जनसहभागिता आधारित स्वास्थ्य जागरूकता मॉडल पर भी विशेष जोर दिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध भविष्य में जिले में मच्छर जनित रोगों की रोकथाम, स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। साथ ही यह अध्ययन प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के लिए भी उपयोगी मार्गदर्शक सिद्ध होगा।

डॉ. लक्ष्मीकांत सिन्हा की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर आई.एस.बी.एम. विश्वविद्यालय परिवार, प्राध्यापकों, सहकर्मियों, विद्यार्थियों, मित्रों एवं क्षेत्रवासियों में हर्ष का वातावरण है। सभी ने उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए इसे गरियाबंद जिले के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया।

इस अवसर पर डॉ. लक्ष्मीकांत सिन्हा ने अपने शोध निर्देशक प्रोफेसर डॉ. पी. विश्वनाथन, विश्वविद्यालय प्रशासन, गुरुजनों, माता-पिता, परिवारजनों, मित्रों, सहकर्मियों तथा विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सफलता उनके माता-पिता के आशीर्वाद, गुरुजनों के मार्गदर्शन और शुभचिंतकों के सहयोग का परिणाम है।

उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में वे गरियाबंद जिले में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने, मच्छर जनित रोगों की रोकथाम तथा ग्रामीण समाज में वैज्ञानिक सोच के प्रसार के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे।

डॉ. सिन्हा की इस उपलब्धि से न केवल आई.एस.बी.एम. विश्वविद्यालय बल्कि पूरा गरियाबंद जिला गौरवान्वित महसूस कर रहा है।







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