एमसीबी : जिले के ग्राम बहेराटोला निवासी एवं तेंदूपत्ता संग्राहक अमोल सिंह के चेहरे पर इन दिनों नई उम्मीद और खुशी साफ दिखाई दे रही है। राज्य सरकार द्वारा तेंदूपत्ता खरीदी की दर 5500 रुपये प्रति मानक बोरा किए जाने के निर्णय ने उनके जैसे हजारों वनवासी परिवारों के जीवन में आर्थिक मजबूती और आत्मविश्वास का नया संचार किया है।अमोल सिंह ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण ग्रामीण और वनवासी परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है, जिससे हर वर्ष हजारों परिवार अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करते हैं।उन्होंने कहा कि पहले मेहनत के मुकाबले आय सीमित थी, लेकिन अब समर्थन मूल्य बढ़ने से मेहनतकश संग्राहकों को उनके श्रम का बेहतर प्रतिफल मिल रहा है। इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और घर की आवश्यक जरूरतों को पूरा करना पहले की तुलना में अधिक आसान हो गया है।
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अमोल सिंह बताते हैं कि बढ़ी हुई राशि से अब वे अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और घरेलू जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर पा रहे हैं। वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के लिए यह निर्णय राहत और सम्मान दोनों लेकर आया है। ग्रामीणों में सरकार के प्रति विश्वास और उत्साह भी बढ़ा है।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार गरीबों, श्रमिकों, किसानों और वनवासियों के हित में संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अब दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है, जिससे ग्रामीण जीवन में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं।अमोल सिंह ने अंत में कहा कि सरकार के ऐसे श्रमिक हितैषी और लोक कल्याणकारी निर्णयों से तेंदूपत्ता संग्राहकों को आर्थिक सुरक्षा मिली है तथा वनवासी परिवारों का जीवन स्तर लगातार बेहतर हो रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी प्रदेश सरकार इसी तरह वनवासियों और श्रमिक वर्ग के हितों की रक्षा और उनके उत्थान के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।

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