छत्तीसगढ़ में तबादलों को लेकर हलचल तेज, टीचर्स एसोसिएशन ने CM और GAD को लिखा पत्र

छत्तीसगढ़ में तबादलों को लेकर हलचल तेज, टीचर्स एसोसिएशन ने CM और GAD को लिखा पत्र

बिलासपुर :  छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने राज्य के हजारों शिक्षकों और शासकीय कर्मचारियों के हित में आवाज उठाते हुए छत्तीसगढ़ सरकार से स्थानांतरण नीति 2026 शीघ्र जारी करने की मांग की है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने इस संबंध में मुख्यमंत्री और सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग को मांग पत्र सौंपा है।

अनिश्चितता के माहौल से घिरे हैं कर्मचारी

एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया, छत्तीसगढ़ राज्य में शिक्षकों और शासकीय कर्मचारियों के स्थानांतरण के लिए समय-समय पर स्थानांतरण नीति जारी की जाती रही है। वर्तमान शैक्षणिक सत्र और वित्तीय वर्ष 2026-27 शुरू होने के बावजूद अब तक स्थानांतरण नीति 2026 जारी नहीं की गई है इसके चलते हजारों शिक्षक और कर्मचारी अपनी पदस्थापना और स्थानांतरण को लेकर अनिश्चितता और असमंजस की स्थिति में हैं।

एसोसिएशन ने रखीं प्रमुख मांगें

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा, प्रदेश संयोजक सुधीर प्रधान, वाजिद खान, प्रदेश उपाध्यक्ष देवनाथ साहू, बसंत चतुर्वेदी, प्रवीण श्रीवास्तव, शैलेन्द्र यदु, कोमल वैष्णव, मुकेश मुदलियार, प्रदेश सचिव मनोज सनाढ्य, प्रदेश कोषाध्यक्ष शैलेन्द्र परिक ने कहा है कि सरकार के समक्ष हमने प्रस्ताव रखा है।

शीघ्र नीति जारी हो: शैक्षणिक सत्र और वित्तीय वर्ष 2026-27 को ध्यान में रखते हुए स्थानांतरण नीति 2026 को बिना किसी विलंब के जल्द से जल्द जारी किया जाए।

पारदर्शी और मानवीय मापदंड: स्थानांतरण नीति में पारदर्शिता, वरिष्ठता, पारिवारिक स्थिति, दिव्यांगता, महिला कर्मचारियों की सहूलियत, गंभीर चिकित्सकीय आधार और दुर्गम क्षेत्रों में सेवा अवधि जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए।

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ऑनलाइन आवेदन और निष्पक्ष काउंसलिंग: भ्रष्टाचार और अनावश्यक देरी पर लगाम कसने के लिए पूरी स्थानांतरण प्रक्रिया ऑनलाइन आवेदन और निष्पक्ष काउंसलिंग के माध्यम से पूरी की जाए।

समयबद्ध कैलेंडर: नीति जारी करने के साथ ही पूरी प्रक्रिया को समय पर संपन्न कराने के लिए एक निश्चित कैलेंडर जारी किया जाए, ताकि शिक्षक और कर्मचारी समय रहते अपने आवेदन प्रस्तुत कर सकें।

शासकीय कार्यों में आएगी गति: छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन का मानना है, यदि सरकार इस विषय पर त्वरित और सहानुभूतिपूर्वक निर्णय लेकर सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से नीति जारी करती है, तो इससे न केवल हजारों कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि शासकीय और शैक्षणिक कार्यों में भी प्रशासनिक गति आएगी।







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