नई दिल्ली : ब्रिटेन के निर्दलीय सांसद रूपर्ट लोव ने प्रवासियों के खिलाफ एक बेहद विवादित टिप्पणी की है, जिसके बाद ब्रिटेन की राजनीति में हड़कंप मच गया है। लोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मेरा मानना है कि हमें उन नौकरियों को करने के लिए लाखों पाकिस्तानियों और भारतीयों को देश में नहीं लाना चाहिए, जिन्हें बेरोजगार ब्रिटिश नागरिकों को करना चाहिए उन्होंने आगे यह भी कहा कि अगर यह बात मुझे नस्लवादी बनाती है, तो ऐसा ही सही।
ग्रेट यारमाउथ निर्वाचन क्षेत्र से सांसद रूपर्ट लोव का राजनीतिक इतिहास भी विवादों से भरा रहा है। जुलाई 2024 में वह दक्षिणपंथी पार्टी रिफॉर्म यूके के टिकट पर चुने गए थे, लेकिन मार्च 2025 में पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया। अब वे रिस्टोर ब्रिटेन पार्टी के नेता हैं, जो प्रवासियों के खिलाफ सख्त रुख रखती है।
उनकी पार्टी ने अपने उन समर्थकों की निंदा करने से भी इनकार कर दिया है, जो सभी गैर-श्वेत नागरिकों को देश से बाहर निकालने यानी पूर्ण पुनर्प्रवासन की मांग कर रहे हैं। इससे पहले दिसंबर 2025 में भी लोव ने ट्वीट कर कहा था कि वे यह सुन-सुनकर थक चुके हैं कि ब्रिटेन को प्रवासियों ने बनाया है।
सांसद के दावें की सच्चाई
आधिकारिक आंकड़े सांसद रूपर्ट लोव के दावों की पूरी तरह गलत साबित करते हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की 2021 की जनगणना के अनुसार, खुद लोव के अपने क्षेत्र ग्रेट यारमाउथ की कुल 99,750 की आबादी में भारतीय और पाकिस्तानी मूल के केवल 907 निवासी रहते हैं, जिसमें 786 भारतीय और 121 पाकिस्तानी है।
जो कि कुल आबादी का 1% से भी कम है। हालांकि, वहां बेरोजगारी दर 9.8% है, जो राष्ट्रीय औसत (5.4%) से लगभग दोगुनी है, लेकिन इसका कारण प्रवासी नहीं हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के माइग्रेशन ऑब्जर्वेटरी के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 तक ब्रिटेन के श्रम बाजार में 20% नौकरियां (65 लाख) गैर-ब्रिटिश नागरिकों के पास थीं। जनवरी 2021 से दिसंबर 2025 के बीच भारतीय और नाइजीरियाई नागरिकों के रोजगार में सबसे तेज वृद्धि देखी गई, लेकिन ये विदेशी कर्मचारी ब्रिटिश नागरिकों की नौकरियां नहीं छीन रहे हैं।
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इसके विपरीत, ये प्रवासी उन क्षेत्रों में काम कर रहे हैं जहां ब्रिटेन में लंबे समय से कर्मचारियों की भारी कमी है। उदाहरण के लिए, गैर-यूरोपीय संघ के नागरिकों की एक-चौथाई नौकरियां स्वास्थ्य और देखभाल क्षेत्र में हैं। इस अवधि में केवल केयर वर्कर्स को 1,61,000 स्किल्ड वर्कर वीजा दिए गए, क्योंकि स्थानीय स्तर पर इन पदों को भरने के लिए ब्रिटिश नागरिक उपलब्ध नहीं थे।
सोशल बेनिफिट्स पर भी फैलाया भ्रम
लोव ने इससे पहले यह झूठा दावा भी किया था कि 13 लाख विदेशी नागरिक ब्रिटेन में यूनिवर्सल क्रेडिट का लाभ ले रहे हैं। लेकिन सरकारी डेटा के अनुसार, यूनिवर्सल क्रेडिट पाने वालों में केवल 13% गैर-ब्रिटिश नागरिक हैं, जो कि कार्यबल में उनकी कुल 16% हिस्सेदारी से भी कम है।
इसके अलावा, ब्रिटेन के कड़े नियमों के अनुसार, वर्क, स्टडी या फैमिली वीजा पर आने वाले प्रवासियों के लिए नो रिकोर्स टू पब्लिक फंड्स का नियम लागू होता है, जिसका मतलब है कि वे सामान्य तौर पर किसी भी सरकारी वित्तीय सहायता या लाभ का दावा नहीं कर सकते।

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