हिंदू मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास में शुभ व मांगिलक कार्य वर्जित होते हैं, लेकिन इसे एक अत्यंत पवित्र महीना माना जाता है। एक पुरानी धारणा है कि अधिक मास में जन्मे लोग 'अशुभ' होते हैं, लेकिन यह पूरा सच नहीं है। चलिए जानते हैं कि ज्योतिषाचार्य इस विषय में क्या कहते हैं।
अशुभ मानने के पीछे का कारण
पौराणिक धारणा के अनुसार, मलमास या पुरुषोत्तम मास में शादी, गृह प्रवेश या मुंडन जैसे शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। इसका कारण यह है कि यह समय आत्म-चिंतन, व्रत-उपवास और दान-पुण्य के लिए निर्धारित किया गया है। लेकिन इन धार्मिक नियमों के कारण से लोगों की यह मानसिकता बन गई है कि यह महीना या इसमें जन्मे लोग अशुभ होते हैं। लेकिन धार्मिक और ज्योतिष दृष्टि से यह धारणा बिल्कुल गलत है।
क्या कहते हैं ज्योतिषाचार्य
एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, ईश्वर की बनाई इस सृष्टि में कोई भी क्षण 'अशुभ' नहीं होता है। अधिक मास तो स्वयं भगवान पुरुषोत्तम का महीना है, इसलिए इसमें जन्म लेने वाला बालक उनकी विशेष कृपा और अद्वितीय गुणों का पात्र होता है। चूंकि इस मास में प्रभु की आराधना करने का फल अनंत गुना बढ़ जाता है, इसी कारण से इस पवित्र समय में अन्य सांसारिक शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं।
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इस मास में जन्म लेने वाले जातक या जातिका अत्यंत भाग्यवान और सौभाग्यशाली होते हैं। सनातन धर्म में 16 संस्कारों का वर्णन मिलता है, जिसमें से जन्म और मृत्यु का कोई भी मुहूर्त मनुष्य के हाथ में नहीं है। अतः इस विषय में किसी भी प्रकार के संशय का प्रश्न ही नहीं उठता।
ये गुण बनाते हैं इन्हें खास
इन बच्चों में बचपन से ही अध्यात्म, पूजा-पाठ और धर्म के प्रति एक गहरी रुचि देखने को मिलती है।
ये लोग नैतिक मूल्यों से कभी समझौता नहीं करते और ईश्वर के प्रति इनकी आस्था हमेशा मजबूत बनी रहती है।
इन्हें जीवन के हर मोड़ पर भाग्य का साथ मिलता है। बंद रास्ते भी इनकी किस्मत के बल पर आसानी से खुल जाते हैं।
ये लोग विपरीत और कठिन परिस्थितियों में भी कभी घबराते नहीं हैं। इनमें संकटों से लड़ने का गजब का साहस होता है
ये जीवन में बेहद साहसी और सटीक निर्णय लेने के लिए जाने जाते हैं।

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