सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण-संवर्धन हेतु ग्राम सभाओं की पहल, कार्ययोजना निर्माण के लिए विभागों से मांगा सहयोग

सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण-संवर्धन हेतु ग्राम सभाओं की पहल, कार्ययोजना निर्माण के लिए विभागों से मांगा सहयोग

परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद : वन अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त सामुदायिक वन संसाधन (सीएफआर) अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं वन संरक्षण को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से गरियाबंद जिले की विभिन्न ग्राम सभाओं के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से जिला मुख्यालय पहुंचकर कार्ययोजना निर्माण के लिए संबंधित विभागों से सहयोग की मांग की। इस संबंध में ग्राम सभा के अध्यक्ष, सचिव, सदस्य तथा प्रयोग समाजसेवी संस्था के कार्यकर्ताओं ने संयुक्त जिला कलेक्टर कार्यालय गरियाबंद में सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग एवं वन अधिकार शाखा के प्रभारी कमलेश्वर पटेल तथा परियोजना समन्वयक दिनेश साहू को ज्ञापन सौंपा।

प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा करते हुए बताया कि वन अधिकार अधिनियम के तहत ग्राम सभाओं को सामुदायिक वन संसाधनों का अधिकार प्राप्त हुआ है। अब इन वन क्षेत्रों के संरक्षण, संवर्धन एवं सतत प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक कार्ययोजना तैयार की जा रही है। ग्राम सभाओं द्वारा वन क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर पौधारोपण, चराई, निस्तार एवं अन्य आवश्यक गतिविधियों के लिए स्थलों का चिन्हांकन भी किया गया है।ग्राम सभा प्रतिनिधियों ने बताया कि तैयार की जाने वाली कार्ययोजना के आधार पर शासन से बजट की मांग की जाएगी, जिससे वन संरक्षण एवं वन संवर्धन के कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके। विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहां वन क्षेत्र विरल हो चुके हैं या हरित आवरण में कमी आई है। ऐसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पौधारोपण कर हरियाली बढ़ाने की योजना बनाई गई है।

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बैठक में आगामी विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाने की रणनीति पर भी चर्चा की गई। ग्राम सभाओं ने वन क्षेत्रों के संरक्षण के साथ-साथ जैव विविधता संवर्धन, जल संरक्षण और स्थानीय समुदायों की आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से विभिन्न विभागों के समन्वय से कार्य करने की आवश्यकता बताई।प्रतिनिधियों ने कहा कि सामुदायिक वन संसाधन कार्ययोजना को सफल बनाने के लिए वन विभाग, उद्यानिकी विभाग, कृषि विभाग, मत्स्य विभाग तथा मनरेगा विभाग का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। इन विभागों की तकनीकी एवं वित्तीय सहायता से वन प्रबंधन के बेहतर मॉडल विकसित किए जा सकते हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों की आजीविका के नए अवसर भी सृजित होंगे।

इस अवसर पर गरियाबंद जिला समन्वयक रेवती यादव, हिरौंधी नेताम, दयावती नागेश, डिलेश नेताम, जानकी जगत, वरिष्ठ समाजसेवी राजेंद्र सिंह राजपूत, ग्राम सभा अध्यक्ष नरेंद्र नेताम, हरदीबाई, गंगाराम, खेमराज मरकाम, प्रेम सिंह, गजेंद्र नागेश, डागेंद्र कुमार नेताम, जनपद सदस्य सहित बड़ी संख्या में ग्राम सभा प्रतिनिधि उपस्थित रहे।ग्राम सभा प्रतिनिधियों ने विश्वास व्यक्त किया कि विभागीय सहयोग और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से जिले में वन संरक्षण, वन संवर्धन तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए जा सकेंगे, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित होगा।







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