बेमेतरा टेकेश्वर दुबे : खरीफ सीजन 2026 के दौरान जिले के किसानों को निर्धारित मूल्य पर, समय पर एवं उच्च गुणवत्तायुक्त उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन पूरी गंभीरता एवं सख्ती के साथ कार्य कर रहा है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी बेमेतरा के निर्देशानुसार जिले में गठित जिला स्तरीय उड़नदस्ता (फ्लाइंग स्क्वाड) टीम एवं कृषि विभाग द्वारा लगातार मैदानी स्तर पर सघन निरीक्षण एवं निगरानी की कार्रवाई की जा रही है।
इसी क्रम में उड़नदस्ता एवं कृषि विभाग की संयुक्त टीम द्वारा अब तक जिले के 132 निजी एवं सहकारी कृषि केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण किया जा चुका है। निरीक्षण के दौरान स्टॉक संधारण में अनियमितता, मूल्य सूची प्रदर्शित नहीं करने तथा उर्वरक नियंत्रण संबंधी नियमों के उल्लंघन के मामले पाए जाने पर 19 विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा अवैध भंडारण एवं नियमों की अवहेलना पाए जाने पर एक विक्रय केंद्र से यूरिया उर्वरक जब्त किया गया है। वहीं गंभीर अनियमितता पाए जाने पर 4 विक्रय केंद्रों पर तत्काल प्रभाव से विक्रय प्रतिबंध लगाया गया है तथा 1 कृषि केंद्र का लाइसेंस निलंबित किया गया है।
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जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत यह कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी। यदि कोई भी निजी कृषि केंद्र या सहकारी समिति निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर खाद विक्रय करते, जमाखोरी करते अथवा अमानक उर्वरकों का व्यापार करते पाए जाते हैं, तो उनके विरुद्ध सीधे पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए न्यायालयीन कार्रवाई की जाएगी। किसानों से प्राप्त शिकायतों एवं गोपनीय सूचनाओं पर बिना पूर्व सूचना के तत्काल छापेमारी की जाएगी।
जिले में उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण, किसानों से वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग की अपील
कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार शासन द्वारा जिले के लिए 68,300 मीट्रिक टन उर्वरक भंडारण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध अब तक 48,569 मीट्रिक टन उर्वरक जिले को प्राप्त हो चुका है, जो गत वर्ष के कुल उर्वरक वितरण का लगभग 75 प्रतिशत है। प्राप्त उर्वरकों में से 30,341 मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 44 प्रतिशत है।
डीएपी उर्वरक के संबंध में विभाग ने बताया कि 16,200 मीट्रिक टन लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 5,165 मीट्रिक टन डीएपी का भंडारण सहकारी समितियों एवं विक्रय केंद्रों में किया जा चुका है। यह मात्रा गत वर्ष हुए डीएपी वितरण की तुलना में लगभग 46 प्रतिशत है। डीएपी के अतिरिक्त जिले को अब तक 7,901 मीट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) तथा 6,279 मीट्रिक टन एनपीके उर्वरक प्राप्त हो चुका है। सिंगल सुपर फास्फेट की उपलब्धता लक्ष्य के विरुद्ध 143 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जिससे जिले में फास्फेटिक उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है।
सिंगल सुपर फास्फेट एवं एनपीके उपयोगी विकल्प
कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) में लगभग 16 प्रतिशत फास्फोरस एवं 11 प्रतिशत सल्फर पाया जाता है, जो फसलों की वृद्धि एवं उत्पादन के लिए अत्यंत लाभकारी है। इसलिए किसान भाई डीएपी की उपलब्धता पर निर्भर रहने के बजाय सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) एवं एनपीके उर्वरकों का भी उपयोग कर सकते हैं। इससे फसलों को आवश्यक पोषक तत्व संतुलित रूप से प्राप्त होंगे तथा उर्वरकों की मांग का दबाव भी कम होगा।
किसानों से अपील
जिला प्रशासन ने जिले के सभी किसान भाइयों से अपील की है कि उर्वरक खरीदते समय विक्रेता से अनिवार्य रूप से पक्का बिल प्राप्त करें। यदि कोई दुकानदार निर्धारित दर से अधिक राशि की मांग करता है, खाद की कृत्रिम कमी बताकर जमाखोरी करता है अथवा किसी प्रकार की अनियमितता करता है, तो इसकी सूचना तत्काल अपने निकटतम कृषि अधिकारी या उड़नदस्ता टीम को दें। प्रशासन किसानों के हितों की रक्षा एवं उन्हें समय पर गुणवत्तायुक्त कृषि आदान उपलब्ध कराने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
उड़नदस्ता टीम में डॉ. श्याम लाल साहू (उर्वरक निरीक्षक एवं नोडल अधिकारी), दिनेश कुमार धुर्वे, देवानंद देवांगन, राकेश कुमार चतुर्वेदी, दीपक कुमार साहू तथा कुलेश्वर सिन्हा सहित कृषि विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हैं, जो जिलेभर में सतत निगरानी एवं निरीक्षण की कार्रवाई कर रहे हैं। अधिक जानकारी के लिए SADO Bemetara-7999469649....
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