परमेश्वर राजपूत गरियाबंद/छुरा: वन विभाग के कर्मचारियों पर एक आदिवासी किसान से कथित रूप से 35 हजार रुपये की अवैध वसूली करने का गंभीर आरोप लगाते हुए पीड़ित किसान ने अपने परिवार सहित वन विभाग कार्यालय छुरा के सामने अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू कर दिया है। 15 जून 2026 से शुरू हुए इस आंदोलन में आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई एवं उन्हें पद से हटाने की मांग प्रमुख रूप से उठाई जा रही है। अनशन स्थल पर लगाए गए बैनर के अनुसार, पीड़ित आदिवासी किसान का आरोप है कि वन विभाग के कुछ कर्मचारियों ने उससे अवैध रूप से 35 हजार रुपये की वसूली की है। मामले की शिकायत जिला प्रशासन, वनमंडलाधिकारी तथा क्षेत्रीय विधायक को पूर्व में दी जा चुकी है। इसके अलावा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसका शिकायत क्रमांक CC260600004419 बताया गया है।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से उन्हें मजबूर होकर परिवार सहित आमरण अनशन का रास्ता अपनाना पड़ा है। अनशनकारियों का आरोप है कि यदि समय रहते मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाती, तो उन्हें इस प्रकार आंदोलन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती।बैनर में वन विभाग के चार कर्मचारियों के नाम भी उल्लेखित किए गए हैं, जिन पर कथित रूप से अवैध वसूली में संलिप्त होने का आरोप लगाया गया है। अनशनकारियों की मुख्य मांग है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों को तत्काल पद से हटाया जाए तथा उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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अनशन में शामिल लोगों का कहना है कि यह केवल एक किसान का मामला नहीं बल्कि आदिवासी समाज और आम नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है। यदि प्रशासन द्वारा शीघ्र उचित कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।वहीं, मामले को लेकर प्रशासन की ओर से गठित टीम धरना स्थल पर पहुंचे जहां उन्होंने छुरा वन विभाग कार्यालय में बयान दर्ज करने के लिए बुलाया गया लेकिन पिड़ित परिवार का कहना है कि धरना स्थल पर ही उनका बयान दर्ज किया जाय और उन चारों वन विभाग के आरोपी कर्मचारियों को वहां से हटाने की मांग पर अड़े हुए हैं पहले उन्हें वहां से हटाया जाए फिर हमारा बयान दर्ज करें। साथ ही पिड़ितों का कहना है कि आरोपी कर्मचारियों के द्वारा उनके ऊपर दबाव बनाया जा रहा है उनके रहते कथित अवैध वसूली प्रकरण की निष्पक्ष जांच संभव नहीं है।
उनकी प्रमुख मांगे हैं
आरोपित कर्मचारियों को तत्काल पद से हटाना।
दोषी पाए जाने पर कठोर कानूनी कार्रवाई।
पीड़ित किसान को न्याय एवं आर्थिक क्षतिपूर्ति प्रदान करना।
गरियाबंद वन मंडलाधिकारी का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान आने के बाद ही इसमें आगे की कार्यवाही हो पाएगा। साथ ही प्रशासन स्तर पर गठित टीम वन विभाग एसडीओ, रेंजर, तहसीलदार एवं अन्य जो टीम है उनका कहना है कि बिना दोनों पक्षों का बयान दर्ज करने और जांच होने पर दोषी पाए जाने वाले वन कर्मियों पर नियमतह कार्यवाही की जाएगी। बरहहाल समाचार लिखे जाने तक पिड़ित परिवार अनशन पर ही है और अगर आरोपी वन कर्मचारियों पर कार्यवाही नहीं होती है तो 17 जून को मुख्यमंत्री का गरियाबंद आगमन पर उनसे मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाने की बात कही जा रही है।

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