इंद्रावती के उस पार पहुंचा प्रशासन-कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने पैदल तय किया दुर्गम सफर, सुनी वनांचल के ग्रामीणों की बातें

इंद्रावती के उस पार पहुंचा प्रशासन-कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने पैदल तय किया दुर्गम सफर, सुनी वनांचल के ग्रामीणों की बातें

दंतेवाड़ा : दंतेवाड़ा जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्रों तक प्रशासन की पहुंच एवं जनहितैषी योजनाओं के क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने गुरुवार विकासखंड गीदम अंतर्गत ग्राम पंचायत गुमलनार के अतिदुर्गम एवं बीहड़ आश्रित ग्राम भिरसापारा और पालोडी का दौरा किया।इस दौरान उन्होंने अधिकारियों के साथ काउरगांव के बिंगूपारा से लगभग 6 से 8 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनीं और क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।

घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी मार्गों से होकर कलेक्टर जब भिरसापारा पहुंचे तो ग्रामीणों ने आत्मीयता के साथ उनका स्वागत किया। लगभग 42 घरों वाले भिरसापारा में कलेक्टर ने किसी औपचारिक बैठक कक्ष के बजाय गांव के बीच स्थित इमली के विशाल पेड़ की छांव को संवाद का माध्यम बनाया। ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर उन्होंने गांव की भौगोलिक स्थिति, आवागमन की चुनौतियों, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, राशन वितरण तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता के संबंध में विस्तार से चर्चा की। वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ग्रामीणों से यह भी जाना कि आगामी चार महीनों के लिए आवश्यक राशन सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित है या नहीं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

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दौरे के दौरान कलेक्टर ने भिरसापारा के आंगनबाड़ी केंद्र का भी निरीक्षण किया। उन्होंने केंद्र में बच्चों को प्रदान किए जा रहे पूरक पोषण आहार, शिक्षा संबंधी गतिविधियों तथा उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से जानकारी प्राप्त की। आंगनबाड़ी में दर्ज बच्चों की उपस्थिति, पोषण आहार वितरण एवं अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। यह देखना सुखद था कि निरीक्षण के दौरान आंगनबाड़ी के बच्चों को गर्म भोजन और पौष्टिक आहार के रूप में उबले अंडे भी परोसे गए थे। 

 यहां कलेक्टर ने ग्रामीणों से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की जानकारी लेते हुए मितानिनों से चर्चा की। उन्होंने गर्भवती माताओं के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के संबंध में जानकारी प्राप्त की। मौके पर मितानिनों ने क्षेत्र में संचालित स्वास्थ्य गतिविधियों एवं टीकाकरण कार्यक्रमों की जानकारी दी, जिस पर कलेक्टर ने स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

 इस दौरान ग्रामीणों ने अपनी आवश्यकताओं और समस्याओं से प्रशासन को अवगत कराया, वहीं कलेक्टर ने भी उनकी बातों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। इसके बाद कलेक्टर फिर पैदल यात्रा कर उसे आगे के एक अन्य आश्रित ग्राम पालोडी पहुंचे यहा भी कलेक्टर ने 26 घरों वाले पालोडी गांव का भी भ्रमण कर वहां की स्थिति का जायजा लिया और ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित किया।

दौरे के दौरान कलेक्टर ने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना ही प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए अधिकारियों को नियमित रूप से दूरस्थ क्षेत्रों का भ्रमण कर ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना चाहिए।

वनांचल क्षेत्र के इस दौरे की विशेषता यह रही कि कलेक्टर ने दुर्गम मार्गों से होकर पैदल यात्रा की और वापसी के दौरान इंद्रावती नदी पार कर ग्राम पंचायत गुमलनार पहुंचे। उनका यह दौरा केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच विश्वास तथा संवाद का एक सशक्त माध्यम बना। ग्रामीणों ने पहली बार किसी जिला कलेक्टर को इस तरह पैदल चलकर अपने गांव तक पहुंचते देखा। इससे उनमें उत्साह और विश्वास का माहौल बना तथा उन्हें यह भरोसा मिला कि उनकी समस्याएं अब सीधे प्रशासन तक पहुंच रही हैं। कलेक्टर का यह वनांचल दौरा संवेदनशील प्रशासन और जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता का एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया।







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