जेल में नाबालिग तो नहीं? निरीक्षण समिति ने जिला जेल सुकमा में की जांच

जेल में नाबालिग तो नहीं? निरीक्षण समिति ने जिला जेल सुकमा में की जांच

सुकमा : जिला स्तरीय जेल निरीक्षण समिति ने मंगलवार को जिला जेल सुकमा का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू की कि कहीं किसी नाबालिग विचाराधीन बंदी को गलतीवश जेल में तो नहीं रखा गया है। यह निरीक्षण माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा रिट पिटीशन क्रमांक (सिविल) 8889/2011 में दिए गए निर्देशों के पालन में किया गया। समिति ने जेल में निरुद्ध बंदियों से बातचीत कर उनकी उम्र और जन्मतिथि संबंधी जानकारी का सत्यापन किया।

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 निरीक्षण के दौरान समिति ने विशेष रूप से 18 वर्ष से कम आयु के विचाराधीन बंदियों की मौजूदगी की जांच की। इस प्रक्रिया में एक विचाराधीन बंदी को प्रथम दृष्टया चिन्हांकित किया गया, जिसकी आयु संबंधी तथ्यों का आगे सत्यापन किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार यदि कोई बंदी नाबालिग पाया जाता है तो उसे तत्काल बाल संप्रेक्षण गृह स्थानांतरित करने की व्यवस्था की जाती है।

 जेल निरीक्षण समिति के अध्यक्ष अधिवक्ता कैलाश जैन के नेतृत्व में जिला बाल संरक्षण अधिकारी जितेन्द्र सिंह बघेल, निरीक्षक पदमा जगत तथा बाल कल्याण समिति की सदस्य चैशवानी सिन्हा ने निरीक्षण में भाग लिया। समिति प्रत्येक तिमाही में जिला जेल का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट विधिक सेवा प्राधिकरण दंतेवाड़ा को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजती है, ताकि किसी भी नाबालिग को जेल में रखने जैसी स्थिति उत्पन्न न हो और बच्चों के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।







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