एमसीबी : आगामी ग्रीष्म ऋतु में पेयजल संकट की संभावनाओं को देखते हुए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी सुश्री संतन देवी जांगड़े ने छत्तीसगढ़ पेयजल परिरक्षण अधिनियम, 1986 क्रमांक-03 एंव 1987 की धारा-03 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए संपूर्ण मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले को 18 अप्रैल 2026 से आगामी आदेश तक जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है। जारी आदेश के अनुसार अधिनियम की धारा-06 के तहत इस अवधि में सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना पेयजल अथवा अन्य किसी प्रयोजन के लिए नया नलकूप खनन नहीं किया जा सकेगा। हालांकि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को जिले में तथा नगर पालिका परिषद, नगर निगम एवं नगर पंचायतों को अपने-अपने नगरीय क्षेत्र में केवल पेयजल प्रयोजन हेतु नलकूप खनन के लिए अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। संबंधित एजेंसियों को खनन कराए गए नलकूपों की जानकारी प्राधिकृत अधिकारी को उपलब्ध करानी होगी।
कलेक्टर द्वारा जल संरक्षण एवं पेयजल प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए नलकूप खनन अनुमति संबंधी प्रकरणों के लिए संबंधित राजस्व अनुभागों के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके तहत मनेन्द्रगढ़ राजस्व अनुभाग के लिए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मनेन्द्रगढ़, खड़गवां राजस्व अनुभाग के लिए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) खड़गवां तथा जनकपुर राजस्व अनुभाग के लिए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) जनकपुर को अधिकृत किया गया है।
ये भी पढ़े :मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है
नलकूप खनन की अनुमति प्राप्त करने के इच्छुक आवेदक संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय से निर्धारित आवेदन पत्र प्राप्त कर सकते हैं। आवेदन पत्र हेतु दो रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है। आवश्यक दस्तावेजों एवं जानकारी सहित आवेदन जमा करने के बाद दस दिवस के भीतर उसकी जांच कर उपयुक्त पाए जाने पर अनुमति प्रदान की जाएगी।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति अथवा एजेंसी अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए बिना अनुमति नलकूप खनन कराते हुए पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने नागरिकों से भूजल संरक्षण, जल स्रोतों के संवर्धन तथा जल के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील करते हुए कहा है कि पेयजल संकट से निपटने के लिए जनसहभागिता और जल संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

Comments