
परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद : एक ओर छत्तीसगढ़ सरकार बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने और विशेष पिछड़ी जनजातियों के सर्वांगीण विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर गरियाबंद जिले के पीपरछेड़ी कला में विशेष पिछड़ी जनजाति (भुंजिया) समाज की बेटियों के लिए करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित 100 सीटर कन्या आश्रम वर्षों बाद भी शुरू नहीं हो सका है। लगभग 2 करोड़ 12 लाख 24 हजार रुपये की लागत से बना यह छात्रावास आज उपयोग के अभाव में वीरान पड़ा है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है।लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्मित इस भव्य भवन का लोकार्पण तत्कालीन मुख्यमंत्री, मंत्रियों एवं जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया गया था। उद्घाटन के समय इसे क्षेत्र की बेटियों की शिक्षा के लिए एक बड़ी सौगात बताया गया था, लेकिन आज तक यहां न छात्राओं का प्रवेश हुआ और न ही नियमित संचालन शुरू हो सका। परिणामस्वरूप भवन खाली पड़ा धूल फांक रहा है और करोड़ों रुपये का सरकारी निवेश निष्प्रभावी साबित हो रहा है।
भुंजिया समाज के पदाधिकारियों एवं ग्रामीणों का आरोप है कि छात्रावास को प्रारंभ कराने के लिए वे लंबे समय से शासन-प्रशासन के समक्ष लगातार आवेदन और ज्ञापन प्रस्तुत कर रहे हैं। गरियाबंद कलेक्टर से लेकर संबंधित विभाग के मंत्रियों तक कई बार मांग रखी गई, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। संचालन, स्टाफ की नियुक्ति और आवश्यक बजट स्वीकृति को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
समाज के लोगों का कहना है कि भुंजिया समुदाय को विशेष पिछड़ी जनजाति का दर्जा मिलने के बावजूद उनकी बेटियों को आवासीय शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित रखा जा रहा है। यदि यह 100 सीटर कन्या आश्रम प्रारंभ हो जाए तो दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों की छात्राओं को सुरक्षित आवास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर भविष्य का अवसर मिल सकेगा। इससे क्षेत्र में बालिका शिक्षा और महिला साक्षरता को भी नई दिशा मिलेगी।भुंजिया समाज के प्रदेश अध्यक्ष ग्वाल सिंह सोरी, जिलाध्यक्ष देवलाल मरकाम, राम सिंह मांझी, जोहत राम मांझी, गनन्द राम भंवर, खगेश्वर भंवर, शत्रुहन लाल नेताम, रामनाथ मरकाम सहित समाज के अन्य पदाधिकारियों ने शासन से तत्काल छात्रावास प्रारंभ करने की मांग की है।
समाज की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—
पीपरछेड़ी कला स्थित 100 सीटर भुंजिया कन्या आश्रम का तत्काल संचालन शुरू किया जाए।
छात्रावास के लिए आवश्यक शिक्षकीय एवं अन्य स्टाफ की नियुक्ति, संसाधनों की उपलब्धता तथा पर्याप्त बजट का शीघ्र आवंटन किया जाए।
विशेष पिछड़ी जनजाति भुंजिया समाज की बेटियों को प्राथमिकता देते हुए गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा सुनिश्चित की जाए।
समाज के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही शासन-प्रशासन द्वारा छात्रावास संचालन के संबंध में ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो भुंजिया समाज व्यापक जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि करोड़ों रुपये की लागत से बने इस छात्रावास में आखिर कब छात्राओं की पढ़ाई शुरू होगी और कब भुंजिया समाज की बेटियों के सपनों को नई उड़ान मिलेगी।

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