आवास प्लस 2.0 की सूची पर ग्राम पंचायतों में बढ़ा असंतोष: "पहले सूची जारी, फिर ग्राम सभा" पर उठे सवाल, सरपंच बोले– अब जनता हमें दे रही गालियां

आवास प्लस 2.0 की सूची पर ग्राम पंचायतों में बढ़ा असंतोष: "पहले सूची जारी, फिर ग्राम सभा" पर उठे सवाल, सरपंच बोले– अब जनता हमें दे रही गालियां

ग्रामीणों ने पात्र हितग्राहियों के नाम छूटने और अपात्रों के शामिल होने का लगाया आरोप, ग्राम सभा की भूमिका पर भी उठे गंभीर सवाल

 

परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद : प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आवास प्लस 2.0 की जारी हितग्राही सूची को लेकर ग्राम पंचायतों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। कई पंचायतों में ग्रामीणों ने सूची पर आपत्ति जताते हुए पात्र परिवारों के नाम नहीं जुड़ने तथा कुछ अपात्र लोगों के नाम शामिल होने का आरोप लगाया है। इस पूरे मामले में सरपंचों ने भी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि सूची जारी होने के बाद अब ग्राम सभा से अनुमोदन कराने के निर्देश दिए जा रहे हैं, जबकि नियमानुसार पहले ग्राम सभा में पात्र एवं अपात्र हितग्राहियों पर चर्चा कर सूची तैयार की जानी चाहिए थी।सरपंचों का कहना है कि सूची पहले से तैयार होकर आने के कारण ग्राम सभा केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। ग्रामीण अपने छूटे हुए नामों को लेकर सीधे पंचायत प्रतिनिधियों से जवाब मांग रहे हैं। कई स्थानों पर लोगों का गुस्सा सरपंचों पर फूट रहा है और उन्हें खरी-खोटी सुननी पड़ रही है।

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सरपंचों के अनुसार यदि ग्राम सभा में पहले से पात्रता का सत्यापन कराया जाता, तो स्थानीय परिस्थितियों और वास्तविक जरूरतमंद परिवारों के आधार पर सूची अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बन सकती थी। लेकिन अब सूची जारी होने के बाद ग्राम सभा से अनुमोदन कराने की प्रक्रिया अपनाने से लोगों में भ्रम और नाराजगी दोनों बढ़ गई हैं।ग्रामीणों का कहना है कि जिन परिवारों के पास आज भी पक्का मकान नहीं है और जो वर्षों से आवास योजना का इंतजार कर रहे हैं, उनके नाम सूची से बाहर हैं। वहीं कुछ ऐसे नाम भी सूची में दिखाई दे रहे हैं, जिनकी पात्रता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इससे योजना की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

पंचायत प्रतिनिधियों ने मांग की है कि जारी सूची का दोबारा परीक्षण कराया जाए तथा ग्राम सभाओं से प्राप्त आपत्तियों और सुझावों के आधार पर पात्र हितग्राहियों के नाम जोड़े जाएं और अपात्र नामों को हटाया जाए। उनका कहना है कि ग्राम सभा स्थानीय लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है और हितग्राहियों के चयन में उसकी भूमिका केवल औपचारिक नहीं बल्कि निर्णायक होनी चाहिए।ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि यदि शासन-प्रशासन वास्तव में जरूरतमंद परिवारों तक आवास योजना का लाभ पहुंचाना चाहता है, तो ग्राम सभा की अनुशंसा को प्राथमिकता देते हुए सूची में आवश्यक संशोधन किया जाना चाहिए। इससे योजना के प्रति लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा और पात्र परिवारों को उनका अधिकार मिल सकेगा।







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