क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि किसी बात, किसी फैसले या गलती के बारे में आप बार-बार सोचते रहते हैं। कुछ लोग भविष्य में होने वाली चिंता के बारे में पहले से ही सोचते रहते हैं। कुछ लोगों को लगता है कि ज्यादा सोचने से वो हर समस्या का समाधान ढूंढ लेंगे और सब कुछ अपने कंट्रोल में कर लेंगे। जबकि सच यह है कि ऐसा करने से अक्सर कोई समाधान नहीं मिलता। बल्कि इससे तनाव, चिंता और मानसिक थकान बढ़ने लगती है।
मनोचिकित्सक, लाइफ कोच और गेटवे ऑफ हीलिंग की संस्थापक डॉक्टर चांदनी तुगनैत के अनुसार, ओवरथिंकिंग यानी जरूरत से ज्यादा सोचना समस्या का समाधान निकलाने की क्षमता बढ़ने की निशानी नहीं है। अगर आप इस आदत को पहचान लेंगे तो इससे आसानी से बाहर निकला जा सकता है।
ओवरथिंकिंग और समस्या का समाधान
कुछ लोगों को लगता है कि हर बात पर ज्यादा विचार करना जिम्मेदारी या समझदारी की निशानी है। लेकिन ऐसा नहीं है। डॉक्टर चांदनी बताती हैं कि जो लोग ओवरथिंकिंग करते हैं, वे ऐसा शौक से नहीं करते। उनका दिमाग यह मान लेता है कि हर संभावित परिस्थिति के बारे में पहले से सोच लेना ही खुद को सुरक्षित रखने और कंट्रोल बनाए रखने का सबसे अच्छा तरीका है।
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लेकिन इससे समस्या का हल नहीं निकलता। उल्टा, व्यक्ति मानसिक रूप से थक जाता है, जबकि आप जिस बात की चिंता कर रहे होते हैं वह अभी हुई भी नहीं होती। समस्या का समाधान आपको आगे बढ़ाता है, जबकि ओवरथिंकिंग आपको एक ही जगह घुमाती रहती है।
जब एक ही बात बार-बार सोचने लगें
ओवरथिंकिंग की सबसे बड़ी पहचान यह है कि आप बिना किसी नतीजे पर पहुंचे, एक ही बात को बार-बार सोचते रहते हैं। यानी आपका दिमाग नए समाधान खोजने के बजाय उसी सोच के चक्कर में फंसा रहता है और बाहर नहीं निकल पाता।
ओवरथिंकिंग से कैसे बचें
सोचने का समय तय करें
अगर कोई बात आपको परेशान कर रही है, तो पूरे दिन उसके बारे में सोचते रहने के बजाय उसके लिए एक तय समय रखें। उस समय में शांति से सोचें कि क्या करना है। समय पूरा होने के बाद उस बात को फिलहाल छोड़ दें और अपने बाकी कामों पर ध्यान दें।
खुद से एक सवाल जरूर पूछें
ओवरथिंकिंग का बड़ा कारण उन बातों की चिंता करना है जो अभी हुई ही नहीं हैं। ऐसे में खुद से सिर्फ एक सवाल पूछें कि क्या यह सच में अभी हो रहा है, या मैं सिर्फ इसकी कल्पना कर रहा हूं। यह सवाल आपको काल्पनिक डर से बाहर निकालकर वास्तविक स्थिति पर ध्यान देने में मदद कर सकता है।
शरीर को एक्टिव रखें
ज्यादा सोचना हर समस्या का हल नहीं है। शारीरिक गतिविधियां दिमाग और नर्वस सिस्टम को शांत करने में मदद करती हैं। इसके लिए आप टहलने जाएं। सोचने से बचने के लिए हल्की एक्सरसाइज करें। घर के काम कर सकते हैं या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात कर सकते हैं। जब आपका ध्यान बार-बार आने वाले विचारों से हटकर किसी काम में लगता है, तो ओवरथिंकिंग से निकलने में मदद मिलती है।
हर विचार सही हो ऐसा जरूरी नहीं
हर कोई कभी न कभी जरूरत से ज्यादा सोचने लगता है। जरूरी है कि आप पहचान सकें कि कब आपका दिमाग समाधान ढूंढ रहा है और कब वह सिर्फ एक ही बात को बार-बार दोहरा रहा है। अगर आप अपनी चिंता को सीमित करना सीखें, फैक्ट्स पर ध्यान दें और बार-बार आने वाले विचारों को खुद पर हावी न होने दें, तो धीरे-धीरे आपका मन ज्यादा शांत और हल्का महसूस करेगा।

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