अयोध्या : राम मंदिर चंदा चोरी मामले में महासचिव पद से इस्तीफा देने के बाद चंपत राय ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी है। उन्होंने एक ओर राम भक्तों के नाम पत्र लिखकर स्वयं को निर्दोष बताया, वहीं दूसरी ओर मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) को भी अपना विस्तृत लिखित बयान सौंपा है।
राम भक्तों को लिखे पत्र में चंपत राय ने कहा कि उन्होंने पूरे मामले पर मौन धारण किया है और उन्हें विश्वास है कि जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सभी के सामने आ जाएगी।
SIT को सौंपे बयान में क्या कहा?
चंपत राय ने अपने बयान में कहा कि 5 फरवरी 2025 को भारतीय स्टेट बैंक की अयोध्या शाखा के मुख्य प्रबंधक द्वारा जारी नोटों की गिनती संबंधी दिशा-निर्देशों से वह सहमत नहीं थे। उनका दावा है कि इस दस्तावेज पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं, जबकि अगस्त 2020 से जून 2026 तक के अन्य संबंधित दस्तावेजों पर उनके और अन्य अधिकारियों के हस्ताक्षर मौजूद हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि उक्त दिशा-निर्देशों की जानकारी उन्हें 13 जून 2026 को अकाउंट ऑफिस से दस्तावेज मिलने के बाद ही हुई। उनके अनुसार, दस्तावेज में प्रति महासचिव को भेजे जाने का उल्लेख था, लेकिन उन्हें इसकी पूर्व जानकारी नहीं दी गई।
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सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
चंपत राय ने अपने बयान में बैंक की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि 9 फरवरी 2024 को बैंक के साथ हुए समझौते (MoU) में सीसीटीवी, सुरक्षा द्वार और नियंत्रित गिनती व्यवस्था जैसे स्पष्ट सुरक्षा प्रावधान किए गए थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि गिनती कक्ष में प्रवेश और निकास के दौरान कर्मचारियों की समुचित तलाशी नहीं ली गई और सुरक्षा संबंधी अन्य नियमों का भी प्रभावी ढंग से पालन नहीं किया गया। उनके अनुसार, यदि निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन होता तो चोरी जैसी घटना की संभावना काफी कम हो सकती थी।
स्टाफ चयन पर भी जताई आपत्ति
चंपत राय ने यह भी कहा कि नोटों की गिनती जैसे संवेदनशील कार्य के लिए जिन लोगों को लगाया गया, वे हाउसकीपिंग स्टाफ से जुड़े थे। उनके अनुसार, इतने महत्वपूर्ण कार्य के लिए इस प्रकार के स्टाफ की तैनाती उचित नहीं थी।
फिलहाल मामले की जांच SIT द्वारा जारी है। चंपत राय के दावों और आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

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