उरला फैक्ट्री ब्लास्ट का बड़ा खुलासा! सुरक्षा में लापरवाही ने ली 3 मजदूरों की जान?

उरला फैक्ट्री ब्लास्ट का बड़ा खुलासा! सुरक्षा में लापरवाही ने ली 3 मजदूरों की जान?

रायपुर:  राजधानी रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र स्थित बेन्द्री की 3D इनोवेशन फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में तीन मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य कर्मचारी बाल-बाल बच गए। धमाका इतना भीषण था कि मृतकों के शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए और राहत-बचाव टीम को उनके अवशेष एकत्र करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना के समय फैक्ट्री में अलग-अलग जिलों से आए दर्जनों मजदूर अपनी शिफ्ट में काम कर रहे थे। विस्फोट की चपेट में आए कर्मचारियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूर मौजूद श्रमिक किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रहे। हादसे के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

घटना के बाद श्रमिकों और स्थानीय लोगों ने फैक्ट्री प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि लंबे समय से श्रमिक सुरक्षा से जुड़े आवश्यक मानकों की अनदेखी की जा रही थी। कुछ कर्मचारियों ने दावा किया कि उन्हें ESI, PF, स्वास्थ्य बीमा जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही थीं। साथ ही हेलमेट, सेफ्टी ग्लव्स, सुरक्षा चश्मा और स्टील-टो जूते जैसे PPE (Personal Protective Equipment) भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं कराए जाते थे। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

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हादसे में बच निकले एक मजदूर ने बताया कि यदि वह कुछ कदम और आगे होता तो शायद उसकी भी जान नहीं बचती। उसने कहा कि धमाके के बाद का दृश्य इतना भयावह था कि मृत साथियों की पहचान करना भी मुश्किल हो गया था।

फायर सेफ्टी कमांडेंट पुष्पराज सिंह ने प्रारंभिक जांच के आधार पर कहा कि किसी भी औद्योगिक इकाई में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन अनिवार्य होता है। शुरुआती निरीक्षण में कुछ जरूरी सुरक्षा व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं मिली हैं। विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फायर विभाग के अनुसार हर फैक्ट्री में हेलमेट, सुरक्षा उपकरण, अग्निशमन यंत्र, आपातकालीन निकासी मार्ग, नियमित मॉक ड्रिल, मशीनों का समय-समय पर मेंटेनेंस, फर्स्ट एड सुविधा और कर्मचारियों को सुरक्षा प्रशिक्षण जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य हैं।

इस बीच कुछ श्रमिकों ने यह भी दावा किया कि फैक्ट्री में उनसे 8 घंटे के बजाय 12-12 घंटे तक काम कराया जाता था, जबकि उन्हें करीब 400 रुपये प्रतिदिन नकद भुगतान किया जाता था। उनका आरोप है कि नियमित स्वास्थ्य जांच और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ भी उन्हें नहीं मिलता था। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।

घटना के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं प्रशासन ने फैक्ट्री हादसे की जांच शुरू कर दी है। मौके पर पुलिस, फायर ब्रिगेड, SDRF और प्रशासनिक अधिकारियों ने पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।

फिलहाल तीन मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि हादसा तकनीकी खराबी का परिणाम था या सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं।







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