परमेश्वर राजपूत,गरियाबंद :एक ओर केंद्र और राज्य सरकार विशेष पिछड़ी जनजातियों के संरक्षण एवं विकास के लिए करोड़ों रुपये की योजनाएं संचालित करने का दावा कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर गरियाबंद जिले के सिकासार जलाशय क्षेत्र के पहाड़ों पर बसे विशेष पिछड़ी भुंजिया जनजाति के परिवार आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवनयापन करने को मजबूर हैं। क्षेत्र के घोंटियादादर नामक मोहल्ले में रहने वाले परिवार आज तक सड़क, बिजली, पेयजल, आंगनबाड़ी और अन्य आवश्यक सुविधाओं से वंचित हैं, जिससे उनका दैनिक जीवन बेहद कठिन हो गया है।ग्रामीणों के अनुसार घोंटियादादर तक पहुंचने के लिए आज भी कोई पक्की सड़क नहीं है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी विकट हो जाती है, जब आवागमन लगभग ठप हो जाता है। किसी मरीज को अस्पताल पहुंचाना या बच्चों को विद्यालय भेजना भी चुनौती बन जाता है। बिजली नहीं होने से परिवार आज भी अंधेरे में जीवन बिताने को विवश हैं, जबकि पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें दूरस्थ प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है।बस्ती में आंगनबाड़ी केंद्र नहीं होने से छोटे बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को शासन की पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सेवाओं की कमी का सीधा असर यहां के बच्चों और महिलाओं पर पड़ रहा है। वहीं कई बच्चों का अभी तक आधार कार्ड नहीं बन पाया है और न ही इन परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल पाया है।
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ग्रामीण बताते हैं कि उनके पूर्वज सिकासार जलाशय के निर्माण से पहले बांध क्षेत्र के आसपास निवास करते थे। जलाशय निर्माण के दौरान उन्हें वहां से हटाकर वर्तमान पहाड़ी क्षेत्र में बसाया गया, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी उनके समुचित पुनर्वास और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था नहीं की गई। परिणामस्वरूप विशेष भुंजिया जनजाति के ये परिवार आज भी विकास की मुख्यधारा से कटे हुए अभावों के बीच जीवन व्यतीत कर रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
उनका कहना है कि यदि सड़क, बिजली, पेयजल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएं, तो उनका जीवन काफी हद तक बेहतर हो सकता है। यह स्थिति शासन-प्रशासन के विकास संबंधी दावों पर सवाल खड़े करती है। विशेष रूप से तब, जब विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान और उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए अनेक योजनाएं संचालित होने की बात कही जाती है। अब आवश्यकता इस बात की है कि प्रशासन इस क्षेत्र का सर्वे कर वास्तविक स्थिति का आकलन करे और घोंटियादादर में रहने वाले विशेष भुंजिया जनजाति के परिवारों को शीघ्र मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी पहल करे।

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