दंतेवाड़ा : आरोपियों के बैंक खातों में साइबर ठगी से संबंधित कुल ₹5,29,898 का संदिग्ध वित्तीय लेन-देन पाया गया।साइबर अपराधों की रोकथाम एवं प्रभावी नियंत्रण को प्राथमिकता देते हुए पुलिस अधीक्षक, दंतेवाड़ा चंद्र मोहन सिंह के निर्देशन, *अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आर.के. बर्मन,अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र खूटे, अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) कुआकोंडा आकांक्षा सिंह ठाकुर तथा साइबर सेल नोडल अधिकारी ठाकुर गौरव सिंह* के मार्गदर्शन में जिले में साइबर अपराधियों एवं उनसे जुड़े नेटवर्क के विरुद्ध सतत एवं प्रभावी कार्रवाई की जा रही है।इसी क्रम में साइबर सेल, दंतेवाड़ा से प्राप्त संदिग्ध म्यूल अकाउंट संबंधी सूचना के आधार पर 9 थाना कुआकोंडा द्वारा विस्तृत जांच एवं तकनीकी विश्लेषण किया गया।
जांच के दौरान साइबर सेल से प्राप्त अभिलेखों एवं समन्वय पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के विश्लेषण से यह तथ्य सामने आया कि आरोपी दीपेश कुंजाम एवं चेतन कुंजाम अपने-अपने बैंक खाते, पासबुक, चेकबुक तथा एटीएम कार्ड अन्य व्यक्तियों को किराये पर उपलब्ध कराते थे। इन बैंक खातों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि के अवैध हस्तांतरण एवं निकासी के लिए किया जाता था। इसके बदले आरोपी कमीशन के रूप में आर्थिक लाभ प्राप्त करते थे।
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विस्तृत वित्तीय जांच में दोनों आरोपियों के बैंक खातों में साइबर ठगी से संबंधित कुल ₹5,29,898 का संदिग्ध लेन-देन पाया गया। उपलब्ध दस्तावेजी एवं डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया आरोप सिद्ध पाए जाने पर आरोपियों के विरुद्ध *भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 317(4) एवं 318(2)* के तहत अपराध पंजीबद्ध कर उन्हें विधिवत गिरफ्तार किया गया। तत्पश्चात दोनों आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया।
गिरफ्तार आरोपी
1. दीपेश कुंजाम, पिता – दिनेश कुंजाम, उम्र 22 वर्ष, निवासी दंतेवाड़ा।
2. चेतन कुंजाम, पिता – सोना राम कुंजाम, उम्र 23 वर्ष, निवासी द3. ंतेवाड़ा।
सराहनीय भूमिका
उक्त कार्यवाही में थाना प्रभारी कुआकोंडा निरीक्षक भीमार्जुन नाथ ताण्डी, उप निरीक्षक खोमन सिंह कोर्राम, सहायक उप निरीक्षक संतोष यादव, प्रधान आरक्षक भरत नेताम, प्रधान आरक्षक मनोज तिवारी एवं आरक्षक संत्यवान कुमार राही* की सराहनीय एवं महत्वपूर्ण भूमिका रही।
दंतेवाड़ा पुलिस की अपील
दंतेवाड़ा पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि किसी भी अज्ञात अथवा अपरिचित व्यक्ति को अपना बैंक खाता, पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड अथवा अन्य बैंकिंग दस्तावेज किसी भी परिस्थिति में उपयोग हेतु न दें और न ही किराये पर उपलब्ध कराएं। साइबर अपराधी लालच, कमीशन अथवा अन्य प्रलोभन देकर बैंक खातों का उपयोग अवैध वित्तीय लेन-देन के लिए करते हैं, जिससे संबंधित खाताधारक भी आपराधिक एवं विधिक कार्रवाई का भागीदार बन सकता है।

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