CG Assembly: मल्हार ताम्रपत्र की भाषा पर विवाद, PM मोदी के बयान का हवाला, मंत्री ने जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा

CG Assembly: मल्हार ताम्रपत्र की भाषा पर विवाद, PM मोदी के बयान का हवाला, मंत्री ने जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा

रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान आज ज्ञान भारतम अभियान के तहत प्राचीन पांडुलिपियों और ऐतिहासिक ताम्रपत्रों के सत्यापन का मुद्दा उठा। कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने मल्हार से प्राप्त ऐतिहासिक बालार्जुन की ताम्रपट्टिकाओं को लेकर प्रश्नकाल में सवाल उठाया। 

विधायक राघवेंद्र सिंह ने सदन में कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात में देश को यह बताया था कि यह ऐतिहासिक ताम्रपत्र ब्राह्मी और पाली भाषा में लिखा गया है। जबकि आज सदन में विभागीय मंत्री कह रहे हैं कि यह ब्राह्मी और संस्कृत भाषा में लिखा गया है। प्रधानमंत्री जब देश के सामने कुछ कहते हैं, तो पूरा देश उसे सही मानकर उस पर अटूट भरोसा करता है। लेकिन मंत्री का यह जवाब देश और सदन को पूरी तरह गुमराह करने वाला है।

उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के अधिकारी गलत तथ्य पेश कर मंत्री से गलत जवाब दिलवा रहे हैं। राघवेंद्र सिंह ने सवाल किया कि सदन को गुमराह करने वाले अधिकारियों के खिलाफ क्या तत्काल कार्रवाई की जाएगी?

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मंत्री बोले-दोषी अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह के सवाल पर संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल बैकफुट पर नजर आए। उन्होंने विपक्ष के आरोप की गंभीरता को देखते हुए सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि इस पूरे मामले में जो भी जिम्मेदार अधिकारी हैं, जिन्होंने यह विसंगतिपूर्ण जानकारी तैयार की है, हम उनके खिलाफ निश्चित रूप से जांच कर कड़ी कार्रवाई करेंगे।

क्या है पूरा मामला?

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने राघवेंद्र सिंह के सवाल के जवाब में बताया कि ज्ञान भारतम् अभियान के तहत छत्तीसगढ़ से मोबाइल ऐप के जरिए कुल 1,24,422 पांडुलिपियों को पंजीकृत किया गया था। इनमें से 12,040 पांडुलिपियां ज्ञानभारतम केंद्र नई दिल्ली द्वारा सत्यापित की जा चुकी हैं, जबकि 1,12,382 पांडुलिपियां तकनीकी या अन्य कारणों से अस्वीकृत कर दी गई हैं।

विवाद की मुख्य वजह बिलासपुर जिले के मस्तूरी क्षेत्र के ऐतिहासिक स्थल मल्हार से प्राप्त प्रसिद्ध बालार्जुन ताम्रपट्टिका बनी। मंत्री ने अपने जवाब में बताया कि इसकी खोज वर्ष 1987 में हुई थी, इसकी लिपि पेटिकाशीर्ष ब्राह्मी और भाषा संस्कृत है। वर्तमान में यह ऐतिहासिक अभिलेख मल्हार निवासी संजीव पाण्डेय के आधिपत्य में सुरक्षित है। इसी भाषा और लिपि के रिकॉर्ड पर कांग्रेस विधायक ने प्रधानमंत्री के वक्तव्य का हवाला देकर अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया।







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