सनातन धर्म में हर पर्व के साथ कुछ रीति-रिवाज जुड़े होते हैं और नाग पंचमी भी उनमें से एक है। इस दिन शिव जी के साथ नाग देवता की पूजा की जाती है। यह पर्व सिर्फ नाग देवता की पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी कई परंपराएं भी सदियों से निभाई जा रही हैं। इन्हीं में से एक है इस दिन तवे पर रोटी न बनाना। यह नियम मुख्य रूप से क्षेत्रीय मान्यताओं से जुड़ा है। आइए जानते हैं कि आखिर इस मान्यता के पीछे क्या कारण बताया जाता है।
तवे से क्यों बनाई जाती है दूरी?
लोक मान्यताओं के अनुसार, नाग पंचमी के दिन धरती के भीतर रहने वाले जीवों के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है। इस दिन तवे की तेज आंच का प्रयोग न करके प्रकृति और नाग देवता के प्रति श्रद्धा प्रकट किया जाता है। यही कारण है कि देश के कई हिस्सों में इस दिन तवे पर रोटी नहीं बनाई जाती।
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नाग पंचमी पर क्या बनता है भोजन?
जिन घरों में यह परंपरा निभाई जाती है, वहां तवे की रोटी के बजाय पूड़ी, खीर, दही-चावल, कचौड़ी, उबले हुए व्यंजन या सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है। कई जगहों पर मिट्टी के बर्तनों में भोजन बनाने की भी परंपरा है। वहीं, कुछ लोग एक दिन पहले ही रोटियां बनाकर रख लेते हैं। अलग-अलग राज्यों में खान-पान की परंपराएं अलग हो सकती हैं।
क्या है इस पर्व का संदेश?
नाग पंचमी केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान का भी संदेश देता है। भगवान शिव के गले में विराजमान नाग यह बताते हैं कि सृष्टि का हर जीव महत्वपूर्ण है। इस दिन खेतों में भी काम रोक दिया जाता है।
क्या सभी के लिए जरूरी है यह परंपरा?
नाग पंचमी पर चूल्हे पर तवा न चढ़ाना आस्था और स्थानीय परंपरा से जुड़ा विषय है, न कि सभी के लिए अनिवार्य धार्मिक नियम। इस परंपरा का पालन परिवार और क्षेत्र की मान्यताओं के अनुसार किया जाता है।
नाग पंचमी पर क्या करना शुभ माना जाता है?

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