लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठत आज स्पीकर की अध्यक्षता में हुई। यह बैठक सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सेशन की तैयारी के लिए हुई। इस बैठक में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा में सभी राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों को जनहित के मुद्दों पर अपने विचार रखने के लिए बुलाया।
सार्वजनिक महत्व और राष्ट्रीय चिंता के मामलों का सुझाव
बैठक के दौरान सरकार और अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के सदस्यों ने सेशन के दौरान उठाए जाने वाले कानूनी और दूसरे कामों पर अपने विचार शेयर किए। सदस्यों ने सेशन के दौरान चर्चा के लिए सार्वजनिक महत्व और राष्ट्रीय चिंता के कई मामलों का भी सुझाव दिया।
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सभी पार्टियों से ओम बिरला ने की अपील
स्पीकर ओम बिरला ने कंस्ट्रक्टिव बातचीत, मतलब वाली भागीदारी और सबसे ऊंची संसदीय परंपराओं को मानने की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने सभी पार्टियों से अपील की कि वे कार्यवाही को सुचारू और व्यवस्थित तरीके से चलाने में अपना पूरा सहयोग दें ताकि लोगों से जुड़े मुद्दों पर पूरी और फायदेमंद तरीके से चर्चा हो सके।
सुझावों पर दिया गया ध्यान
कमेटी ने सदस्यों के सुझावों पर ध्यान दिया। चर्चा का शेड्यूल और काम के अलग-अलग आइटम के लिए समय का बंटवारा तय संसदीय प्रक्रियाओं के हिसाब से और सरकार और राजनीतिक पार्टियों के नेताओं से सलाह करके किया जाएगा।
स्पीकर ने भरोसा जताया कि सभी सदस्य मिलकर काम करेंगे ताकि बड़े जनहित में एक प्रोडक्टिव और सम्मानजनक मॉनसून सेशन हो सके।
संसद सत्र में सहयोग और सार्थक चर्चा की अपील- रिजिजू
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने रविवार को सभी विपक्षी दलों से मानसून सत्र के दौरान संसद की कार्यवाही सुचारू रूप चलने देने की अपील की है। रिजिजू ने कहा कि यह साबित हो चुका है कि सदन में हंगामा करने का राजनीतिक लाभ नहीं होता है। सर्वदलीय बैठक के बाद उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को संसद के मानसून सत्र के दौरान सरकार द्वारा लाए जाने वाले विधेयकों को सार्थक चर्चा के साथ पारित करना चाहिए।
टीएमसी के 20 बागी सांसदों पर भी बोले रिजिजू
रीजीजू ने 'नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में शामिल होने की घोषणा करने वाले तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों वाले गुट को बैठक में बुलाने के फैसले को उचित करार देते हुए कहा कि वह इतने सदस्यों को बैठक से कैसे दूर रख सकते थे। उन्होंने इस विषय को लेकर विपक्षी दलों के बैठक से कुछ देर के लिए बहिर्गमन करने को लेकर कहा कि यह उनका अधिकार है और यह एक सांकेतिक विरोध था।

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