सनातन धर्म में देवशयनी एकादशी का अधिक महत्व है। यह एकादशी आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को है। इस दिन से चातुर्मास शुरू होता है।
चातुर्मास के दौरान शुभ और मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चातुर्मास में भगवान विष्णु 4 महीने के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और भगवान विष्णु कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन जागते हैं। कार्तिक माह में देवउठनी एकादशी मनाई जाती है। अब आप सोच रहे होंगे कि चातुर्मास के दौरान सृष्टि का संचालन कौन करता है। चलिए आपको बताते हैं कि चातुर्मास की अवधि के दौरान सृष्टि का संचालन कौन करता है।
चातुर्मास में सृष्टि का संचालन कौन करता है?
पौराणिक कथा के अनुसार, जब जगत के पालनहार भगवान विष्णु 4 महीने के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं, तो चातुर्मास की अवधि के दौरान सृष्टि का संचालन देवों के देव महादेव यानी भगवान शिव संभालते हैं। आखिर यही वजह है कि चातुर्मास का पहला महीना यानी सावन भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित होता है। इस दौरान भगवान शिव सृष्टि का संचालन करते हैं। चातुर्मास में भगवान शिव के द्वारा सृष्टि के संचालन का वर्णन शिव पुराण की रुद्र संहिता और कोटिरुद्र संहिता में मिलता है।
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देवशयनी एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 24 जुलाई को सुबह 09 बजकर 12 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 25 जुलाई को 11 बजकर 34 मिनट पर होगा। ऐसे में देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को मनाई जाएगी। इस दिन से चातुर्मास की शुरुआत होगी।
कब करें व्रत का पारण?
एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर किया जाता है। व्रत का पारण करने का समय 26 जुलाई को सुबह 05 बजकर 39 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 22 मिनट तक है। इस दिन अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करें। ऐसा माना जाता है कि विशेष चीजों का दान करने से व्रत सफल होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में कभी भी अन्न-धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता।

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