राजनांदगांव : राजनांदगांव जिले के विकासखंड छुरिया अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला लालूटोला में सरकारी निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों को कबाड़ी के हाथ बेचने के मामले में शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने जांच प्रतिवेदन के आधार पर विद्यालय की प्रधान पाठक श्रीमती कजला महिलांगे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई विकासखंड शिक्षा अधिकारी, छुरिया द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट के बाद की गई।
डीईओ द्वारा 17 जुलाई 2026 को जारी आदेश में कहा गया है कि निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों के अपलेखन (निस्तारण) की निर्धारित प्रक्रिया पूरी किए बिना उन्हें कबाड़ी को बेच दिया गया। इसे पदीय कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही, भंडार क्रय नियमों का उल्लंघन, शासकीय संपत्ति के दुरुपयोग और शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाने वाला कृत्य माना गया है। आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि प्रथम दृष्टया यह कदाचार की श्रेणी में आता है।
आचरण नियमों के उल्लंघन पर निलंबन
आदेश के अनुसार संबंधित कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का उल्लंघन है। इसी आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत प्रधान पाठक श्रीमती कजला महिलांगे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
फोटो-वीडियो सामने आने के बाद शुरू हुई जांच
यह मामला तब सुर्खियों में आया था जब लालूटोला स्कूल परिसर में कबाड़ी की गाड़ी बुलाकर सरकारी पुस्तकों को बेचे जाने का फोटो और वीडियो सामने आया। मामले के उजागर होने के बाद शिक्षा विभाग ने पहले संबंधित शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा और फिर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर पूरे प्रकरण की जांच कराई।
जांच दल ने विद्यालय पहुंचकर संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज किए, दस्तावेजों की जांच की और अपनी रिपोर्ट विकासखंड शिक्षा अधिकारी को सौंपी। इसी जांच प्रतिवेदन के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी ने निलंबन की कार्रवाई की।
डोंगरगढ़ रहेगा निलंबन अवधि का मुख्यालय
जारी आदेश के अनुसार निलंबन अवधि के दौरान श्रीमती कजला महिलांगे का मुख्यालय कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी, डोंगरगढ़ निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।
अब अन्य आरोपों पर भी कार्रवाई का इंतजार
प्रधान पाठक के निलंबन के बाद अब शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। जांच के दौरान एक शिक्षिका के बिना आवेदन विद्यालय छोड़ने, दूसरी शिक्षिका के निर्धारित समय से देर से पहुंचने तथा मुख्यालय में निवास नहीं करने जैसे आरोप भी सामने आए थे। हालांकि इन बिंदुओं पर अब तक विभाग की ओर से किसी अलग कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल सरकारी पुस्तकों को कबाड़ी को बेचने के मामले में शिक्षा विभाग ने बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए प्रधान पाठक को निलंबित कर स्पष्ट संदेश दिया है कि शासकीय संपत्ति के दुरुपयोग और नियमों की अनदेखी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब पूरे मामले में विभाग की आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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