चौपालों में छोटी-छोटी सभाओं में कृषि कानूनों के खतरे गिनाए जा रहे

chhattisgarh.co 18 october 2021 : छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के विरोध की गोलबंदी जड़ पकड़ने लगी है। राजिम में किसान महापंचायत में बड़ी भीड़ जुटाने के बाद छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के नेता अब गांव-गांव पहुंच रहे हैं। यहां चौपालों में छोटी-छोटी सभाओं में कृषि कानूनों के खतरे गिनाए जा रहे हैं। वहीं न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी की गारंटी वाले कानून की मांग शुरू हुई है।

महासंघ के प्रमुख पदाधिकारियों ने पिछले दिनों आरंग के निसदा गांव में किसान चौपाल की। यहां किसानों ने राजिम किसान महापंचायत के आयोजकों में शामिल रहे तेजराम विद्रोही, जागेश्वर जुगनू चन्द्राकर और मदन लाल साहू का गमछा व नारियल भेंट कर स्वागत किया। ग्रामीण खुम्मन सिन्हा, त्रिभुवन साहू, सीताराम साहू, दशरू साहू, नरेशू ध्रुव, पुराणिक साहू, मनहरण साहू आदि ने किसान महापंचायत राजिम का अनुभव साझा किया।

किसानों ने कहा, वहां जाने के बाद ही जाना कि केन्द्र सरकार द्वारा लाया गया कृषि कानून कितना खतरनाक और भयावह है। बाद में किसान नेताओं ने तीनों कृषि संबंधी कानूनों पर बात की। उन्होंने कहा, इस कानून की वजह से परिस्थितियां भयावह होती जाएंगी। इसलिए देश भर में इसका विरोध हो रहा है। किसान नेताओं ने कहा, किसानों की हालत सुधारने का फिलहाल एक ही समाधान दिख रहा है, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल की बिक्री की गारंटी मिले। चाहे वह फसल मंडी में बिके अथवा मंडी के बाहर।

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